11th Ayurveda Day । Ayurveda for a Healthier Tomorrow । National Ayush Mission । AYUR SWASTHYA: आयुर्वेद फॉर ए हेल्दी टुमॉरो विचार के साथ सरकार हेल्थकेयर, रिसर्च और एजुकेशन को दे रही बढ़ावा

11th Ayurveda Day । Ayurveda for a Healthier Tomorrow । National Ayush Mission । AYUR SWASTHYA: आयुर्वेद फॉर ए हेल्दी टुमॉरो विचार के साथ सरकार हेल्थकेयर, रिसर्च और एजुकेशन को दे रही बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत 23 सितंबर को 11th Ayurveda Day मना रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, विनियमन, डिजिटल पहुंच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में आयुर्वेद की भूमिका का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

इस वर्ष की थीम “Ayurveda for a Healthier Tomorrow” है। सरकार आधुनिक स्वास्थ्य सेवा के साथ चिकित्सा की इस पारंपरिक प्रणाली को एकीकृत करने के प्रयासों को रेखांकित कर रही है, साथ ही साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया जा रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में आयुर्वेद का विस्तार

राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आयुर्वेद सहित आयुष सेवाओं का विस्तार कर रही है।

2014-15 और 2025-26 के बीच केन्द्र सरकार ने आयुष स्वास्थ्य सेवा को पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ एकीकृत करने के लिए National Ayush Mission के माध्यम से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को 6,406.99 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए।

19 सितंबर, 2026 तक 12,260 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) कार्यरत थे, जबकि लक्ष्य 12,500 का था।

13,249 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में मानक चिकित्सा देखभाल के साथ आयुष सेवाएं भी प्रदान की जा रही हैं। इनमें 6,302 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 3,191 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 475 जिला अस्पताल और 3,281 अन्य स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं।

सरकार राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में 25,322 आयुष डॉक्टरों और 5,666 आयुष पैरामेडिक्स के वेतन के लिए वित्त पोषण कर रही है।

इस पहल में मौजूदा क्लीनिकों का उन्नयन, एकीकृत अस्पतालों की स्थापना, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और सामुदायिक स्वास्थ्य तथा जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार भी शामिल है।

आयुर्वेद टेलीमेडिसिन और बीमा में शामिल

डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से भी आयुर्वेद सेवाएं सुलभ हो रही हैं।

सरकार का ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म, जिसने 50 करोड़ से अधिक मरीजों को सेवाएं दी हैं, आयुष ओपीडी सेवाएं प्रदान करता है, जिससे लोग आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों में विशेषज्ञता रखने वाले डॉक्टरों से वर्चुअल माध्यम से परामर्श कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक उपचार को भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया गया है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने 2024 में बीमाकर्ताओं के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित पॉलिसियों के तहत आयुर्वेद सहित सभी चिकित्सा प्रणालियों को कवर करने वाले उत्पाद या ऐड-ऑन की पेशकश करना अनिवार्य किया।

फरवरी 2026 में, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) को कैशलेस उपचार के लिए एक साझा समझौते के तहत सभी 32 सामान्य बीमा कंपनियों के पैनल में शामिल किया गया।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता और अनुसंधान

सरकार की विज्ञप्ति में आयुर्वेद को WHO के रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के 11वें संशोधन के मॉड्यूल में शामिल किए जाने को भी रेखांकित किया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार, इससे आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के निदानों को मानक कोड का उपयोग करके दर्ज किया जा सकता है, जिससे दस्तावेजीकरण, अनुसंधान, नीति निर्माण और बीमा प्रक्रिया में सहायता मिलेगी।

अनुसंधान और वैज्ञानिक सत्यापन प्रमुख क्षेत्रों में बने हुए हैं। 2021-22 में शुरू की गई AYURGYAN योजना के तहत 34 परियोजनाओं में कुल 17.79 करोड़ रुपये के अनुसंधान कोष में से आयुर्वेद-विशिष्ट 17 परियोजनाओं के लिए 9.38 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2026 की शुरुआत तक 11 विशिष्ट अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जबकि 2014-15 और 2025-26 के बीच आयुर्वेदिक अनुसंधान में 33 विशिष्ट प्रकाशनों का योगदान रहा।

AYUR SWASTHYA योजना ने भी अनुसंधान, नैदानिक अध्ययन, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों और बुनियादी ढांचे के विकास को समर्थन दिया है। इस पहल के तहत स्थापित 28 विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्रों में से 22 आयुर्वेद-केन्द्रित अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर केन्द्रित हैं।

आयुर्वेद शिक्षा में वृद्धि

स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ आयुर्वेद के शैक्षणिक संस्थानों में भी वृद्धि हुई है।

13 मार्च, 2026 तक भारत में 593 आयुर्वेद कॉलेज थे, जिनमें स्नातक स्तर पर 45,245 सीटें और स्नातकोत्तर स्तर पर 5,673 सीटें थीं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 17 आयुष कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिनमें 12 आयुर्वेदिक शिक्षा पर केंद्रित हैं।

केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद भी फेलोशिप, प्रशिक्षण और छात्र कार्यक्रमों के माध्यम से अनुसंधान क्षमता को समर्थन दे रही है। इसके SPARK कार्यक्रम से 2022-23 और 2024-25 के बीच 289 आयुर्वेद कॉलेज लाभान्वित हुए।

गुणवत्ता और विनियमन पर ध्यान

सरकार आयुर्वेदिक दवाओं के लिए नियामक तंत्र को भी मजबूत कर रही है।

आयुर्वेदिक दवाओं को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 के तहत विनियमित किया जाता है। निर्माताओं के लिए अच्छी विनिर्माण प्रथाओं का पालन करना तथा सुरक्षा, प्रभावकारिता और फार्माकोपियल मानकों को पूरा करना आवश्यक है।

सरकारी औषधि निरीक्षक नमूने लेते हैं और उनकी जांच करते हैं, जबकि ई-औषधि पोर्टल दवा निर्माण लाइसेंस आवेदनों की कागज रहित प्रक्रिया और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुर्वेद आहार के लिए भी नियम लागू किए हैं, जिससे पारंपरिक आयुर्वेदिक आहार उत्पादों के लिए एक मानकीकृत ढांचा स्थापित हुआ है।

वैश्विक साझेदारी का विस्तार

भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी विस्तार कर रहा है।

सरकार के अनुसार, भारत ने 27 देशों के साथ देश-से-देश समझौता ज्ञापनों (MoUs), आयुष अकादमिक चेयर के लिए 16 MoUs और सहयोगात्मक अनुसंधान एवं शिक्षा को कवर करने वाले संस्थान-से-संस्थान 57 MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं।

43 देशों में 46 आयुष सूचना केन्द्र भी हैं और अंतरराष्ट्रीय आयुष फेलोशिप/छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेशी नागरिकों के लिए 104 छात्रवृत्तियां उपलब्ध हैं।

नई दिल्ली ने दिसंबर 2025 में दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 22 स्वास्थ्य मंत्रियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक रूप से समर्थित दृष्टिकोणों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने के लिए दिल्ली घोषणा को अपनाया।

आयुष के लिए 4,408 करोड़ रुपये का आवंटन

केन्द्रीय बजट 2026-27 में आयुष मंत्रालय के लिए 4,408 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

प्रमुख पहलों में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन तथा जामनगर स्थित WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का उन्नयन शामिल है।

सरकार का दृष्टिकोण आयुर्वेद के इर्द-गिर्द एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अनुसंधान, विनियमन, डिजिटल सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं, साथ ही वैज्ञानिक सत्यापन और गुणवत्ता मानकों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

(Input from DD News)

 

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Comments ( 0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to comment!