नई दिल्ली । भारत के पशुधन क्षेत्र में संस्थागत ऋण, दुग्ध उत्पादन, वैज्ञानिक प्रजनन और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। Union Minister for Fisheries, Animal Husbandry and Dairying राजीव रंजन सिंह ने मंगलवार को कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत पशुपालन किसानों की संख्या 2025-26 में बढ़कर 50.42 लाख हो गई है।
मंत्री ने कहा कि पशुधन किसानों के लिए KCC कवरेज 2021-22 में 15.08 लाख लाभार्थियों से बढ़कर 2025-26 में 50.42 लाख हो गया है, जो पशुपालन क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण तक बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
भारत का वार्षिक दुग्ध उत्पादन भी 2024-25 में 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो लगभग 243 मिलियन टन की घरेलू मांग से अधिक है। मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में डेयरी निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर रहा।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय एक साथ पशुधन की आनुवंशिकी, उत्पादकता, चारा उपलब्धता और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है।
वैज्ञानिक प्रजनन पर ध्यान
दिसंबर 2014 से लागू की जा रही राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) योजना देशी मवेशी नस्लों के विकास और संरक्षण, गोवंश की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार तथा दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर केन्द्रित है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पशुधन की उत्पादकता और आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार करके डेयरी फार्मिंग को अधिक लाभकारी बनाना है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), जिसे 2014-15 से लागू किया जा रहा है, वैज्ञानिक पशुधन एवं कुक्कुट प्रजनन, चारा विकास, उद्यमिता और प्रति पशु उत्पादकता में सुधार पर केंद्रित है।
यह योजना रोजगार सृजन करने तथा असंगठित क्षेत्र के पशुधन उत्पादकों और संगठित बाजारों के बीच अग्रिम एवं पश्चवर्ती संबंधों को मजबूत करने का भी प्रयास करती है।
NLM उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत व्यक्तियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों, किसान सहकारी संगठनों और धारा 8 कंपनियों को पात्र गतिविधियों के लिए 50 प्रतिशत तक की पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है।
इस योजना में पशुधन और कुक्कुट नस्ल विकास, चारा एवं फीड विकास, अनुसंधान एवं विकास, पशुधन बीमा और विस्तार सेवाओं जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रोग नियंत्रण को मजबूत करना
मंत्रालय पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पशुधन रोगों की रोकथाम के उपायों का भी विस्तार कर रहा है।
इस कार्यक्रम के तहत केन्द्र सरकार राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को खुरपका-मुंहपका रोग (FMD), ब्रुसेलोसिस, छोटे जुगाली करने वाले पशुओं की महामारी (PPR) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF) सहित विभिन्न रोगों के खिलाफ टीकाकरण के लिए 100 फीसदी वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
राज्य की प्राथमिकता वाली गतिविधियों के लिए लागत-साझाकरण के आधार पर वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। इनमें अन्य पशुधन रोगों के खिलाफ टीकाकरण, उभरते और विदेशी रोगों का नियंत्रण, प्रयोगशालाओं को मजबूत करना, रोग निगरानी, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।
तमिलनाडु में 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां
तमिलनाडु में मंत्रालय 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVUs) के संचालन के लिए लागत-साझाकरण के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
इन मोबाइल इकाइयों का उद्देश्य किसानों तक सीधे पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है, जिससे पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार हो, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए जहां पशु चिकित्सा सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
मंत्रालय ने कहा कि संस्थागत ऋण, वैज्ञानिक प्रजनन, चारा विकास, रोगों की रोकथाम और घर-द्वार पर पशु चिकित्सा सेवाओं पर संयुक्त ध्यान का उद्देश्य पशुधन उत्पादकता में सुधार करना, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और अधिक लचीले पशुपालन क्षेत्र का निर्माण करना है।
(Input from DD News)
Comments ( 0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to comment!