नई दिल्लीः भारत के CJI श्री सूर्यकान्त ने न्यायिक अधिकारियों को सलाह दी है कि तकनीक का उपयोग न्याय की मानवीय भावना को प्रतिस्थापित करने के बजाय उसे सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
वे आज बेंगलुरु में कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघ द्वारा आयोजित “AI (कृत्रिम मेधा) के युग में न्यायपालिका की पुनर्कल्पना” विषय पर 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय न्यायिक अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
CJI ने कहा कि न्यायपालिका को तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ दार्शनिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया में AI एआई के समावेशन का मार्गदर्शन संतुलन के सिद्धांत से होना चाहिए, ताकि इसकी उपयोगिता से दक्षता बढ़ाई जा सके, जबकि न्याय के केंद्र में मौजूद मानवीय बुद्धिमत्ता, अनुभव और संवैधानिक चेतना को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
CJI ने न्यायिक अधिकारियों से कहा कि वे निर्णय प्रक्रिया को केवल कानूनी सिद्धांतों के अनुप्रयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे वास्तविक परिस्थितियों से जुड़ाव के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि न्याय कोई यांत्रिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि वह मानवीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, जिन्हें वह नियंत्रित और संतुलित करने का प्रयास करता है।
(Input from News on Air)
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